ध्यान में होने वाले अनुभव भाग- तीन

शक्तिपात-हमारे गुरु या ईष्ट देव हम पर समयानुसार शक्तिपात भी करते रहते हैं। उस समय हमें ऐसा लगता है जैसे मूर्छा (बेहोशी) सी आ रही है या अचानक आँखें बंद होकर गहन ध्यान या समाधि की सी स्थिति हो जाती है, साथ ही एक दिव्य तेज का अनुभव होता है और परमानंद का अनुभव बहुत देर तक होता रहता है। ऐसा भी लगता है जैसे कोई दिव्य धारा इस तेज पुंज से निकलकर अपनी और बह रही हो व अपने भीतर प्रवेश कर रही हो। वह आनंद वर्णनातीत होता है। इसे शक्तिपात कहते हैं।
Meditation-2
जब गुरु सामने बैठकर शक्तिपात करते हैं तो ऐसा लगता है की उनकी और देखना कठिन हो रहा है। उनके मुखमंडल व शरीर के चारों तरफ दिव्य तेज/प्रकाश दिखाई देने लगता है और नींद सी आने लगती है और शरीर एकदम हल्का महसूस होता है व परमानन्द का अनुभव होता है। इस प्रकार शक्तिपात के द्वारा गुरु पूर्व के पापों को नष्ट करते हैं व कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करते हैं।

ध्यान/समाधि की उच्च अवस्था में पहुँच जाने पर ईष्ट देव या ईश्वर द्वारा शक्तिपात का अनुभव होता है। साधक को एक घूमता हुआ सफ़ेद चक्र या एक तेज पुंज आकाश में या कमरे की छत पर दीख पड़ता है और उसके होने मात्र से ही परम

2 Responses

  1. Rajbeer Sagar

    धयान के विषय मे इतनी जानकारी आपने दी इसके लिये हम ह्दय से आपके आभारी हैं

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